Jinvar taru shasan
जिनवर तारु शासन, आ जगमा छे महान अना आधारे, मारे तरवो आ संसार मने ओज तारशे, भव पार उतारशे मझधार मा नैया, काठे पहोचाडशे ओवी मुझने श्रद्धा छे, साची साची श्रद्धा छे द्रढ मुझने श्रद्धा छे, पाखे पाये श्रद्धा छे...
नश्वर संबंधो, ज्यारे साथ छोडशे त्यारे निश्चय मारो, हाथ पकडशे समझण देशे, सांत्वन देशे, शक्ति पण देशे भुलो जो पडिश मुझने, मार्ग ओ देखाडशे ढिलो जो पडिश मारो, सत्व अ वधाडशे जिनवर तारु शासन...
मुंझवण थशे तो, मार्गदर्शन आपशे अवढव मा साची, समझण आपशे मोक्ष मार्ग नु एकांते, आकर्षण आपशे पुरुषार्थ करशे ऐने, आधार आपशे समर्पित थयेला नु, ध्यान सदा राखशे जिनवर तारु शासन...
अज्ञान अंधकार ने, दुर करशे ज्ञान ना अजवाळा, जरुर ओ करशे सत्य देशे, तत्व देशे, मिथ्यात्व हरशे अशुद्ध ओवा आतमाने, शुद्ध अ बनावशे साधना करावी अंते, सिद्ध पण बनावशे जिनवर तारु शासन...
शासन एकांते सहुने, सुखदायी छे शासन थी विपरीत बधु, दुःखदायी छे जिनशासन नी, दर एक आज्ञा, शिवदायी छे आज्ञा जे पाळशे ते, शिव सुख पामसे शरणे जाशे जे एना, भव दुःख भांगशे जिनवर तारु शासन...
Lyrics and singer: Bhartiben Gada