Vande Shashanam
ओ वीर तारुं शासन मुजने, प्राण थकी पण प्यारुं, तारा शासन काजे जीवी, फीटवानी हिंमत धारुं, तारा शासन काजे मरी, फीटवानी हिंमत धारूं, वंदे शासनम्.. वंदे शासनम्... वंदे शासनम्... [१]
वैशाख सुद अगियारस दिवसे, शासन स्थाप्यु ते तो,
भव तरवा काजे ए नावडुं, तरतुं मुक्युं ते तो, जनम्या अमे जिनशासन मांही, गौरव एनु धारुं, वंदे शासनम्.. वंदे शासनम्... वंदे शासनम्... [२]
चोर लुटारु डाकू तरीया, तारा आ शासनथी, आशा छे निश्चय अमे तरशुं, भीम भयंकर भवथी, लोही तणां आ बुंदे बुंदे, शासन प्रेम वधारूं, वंदे शासनम्.. वंदे शासनम्... वंदे शासनम्... [३]
तुज शासननी रक्षा काजे, कुरबानी छे मारी, अंगे अंगे व्यापी गई छे, जिनशासन खुमारी, प्राण अमारो ऋण तमारुं ओ वीर शासन तारुं, वंदे शासनम्.. वंदे शासनम्... वंदे शासनम्... [४]
विषयो केरी आग ने ठारे, शासन रुपी पाणी, पापीने पण पुनीत करती, वीरनी मधुरी वाणी, रगरग मांही नसनस मांही, वसजो शासन तारुं, वंदे शासनम्.. वंदे शासनम्... वंदे शासनम्... [५]
जुगजुग सुधी जगहित काजे, जीवो आ जिनशासन, एना चरणे धरशुं अमे आ तन-मन ने नर जीवन, शासन केरी ज्योति कापे, पाप तणु अंधारुं, वंदे शासनम्.. वंदे शासनम्... वंदे शासनम्... [६]
शासन केरी भक्ति करतां, देह भले छूटी जातो, मोत मळे शासन खातर तो, अंगे हरख न मातो, जयवंतु जिनशासन पामी, लागे जग आ खारुं, वंदे शासनम्..वंदे शासनम्... वंदे शासनम्... [७]