Rajoharan Daan







मम मुंडावेह... मम पव्वावे... मम वेषम् समप्पेह.....

रजोहरण महाविदेह नगरे, सीमंधरानी संगे विवरे घर-बाहुबहु रजोहरण प्रभु हाये लीतुं घाति-अधाति कर्म विनाशक, रजोहरण गेमां छे सहायक रजोहरणनी मंगलगाथा, महाविदेहे सौगंधर माता भरतरायने राज गुलावे, बाहुबलीनुं अगिंगान छुडावे धाने अणगार बनावे, रहनेमिने मे सिंद्ध बनावे जोहरताना हाये, रजोहरण जंबुनो साथे अभयकुमार-ठण मुनिराजा, स्थुलोगट वैरागी थाता चौद-राजलोके जे न्यारो, अवसागरयो (तरवा सहारो )...

श्री जिनवर शरण हारण, आपे मुक्तिनुं दान संयम पंथ के शूरवीरोनो, नहीं कायरनुं काम शुद्ध भावे संयम घरे, मेथी शोभे अणगार साधु जीवननो छ शणगार, रजोहरण सुखकार...

रजोहरण वितरागनो वैभव, रजोहरण गणधरोतुं कलरव सुर-नर-इन्द्र वंदे निशदिन, राजवीओ गे झखें हरदिन चक्रवर्ती पटखंड त्यजीने, निजानंदमां मस्त बनीने अगणधर्म नो वेश सजोने, गिनमाणा शिरधार लईने रजोहण ऋषमनी शोभा, रजोहरण अजितनी माया आदि-अनादि काळयो मोहे. गेना वेगे शासन सोहे असंभव के संभव यावे, शिवसुखना अभिनंदन पावे रमोहरण सुमति देनारूं, रजोहरण (पद्म सु प्यारुं ).... शुक्ष्म जीवोनी पालकमाता, कहे सुपार्थ मंगलवार्ता जोहरण चंद्र सम उजवल, स्त्रोहरण संयमनो सुर्विधि रोम-रोम हर्षित थर्ह नावे, अभयदान सर्वो जौवने आपे बउमर्ति भ्रमणा अंत करावे, रागी मटी वितरागी बनावे रजोहरण चंदन सम शीतल, रजोहरण श्रेयांसनी भीतर वासु-विमल-अनंतनो धर्म, शांति-कुंथुं-अर-मल्लिनो अंश रजोहरण वीतरागनों वंश, मोक्षनगरनो छ छे पंथ मुर्निर्जिणंदा ना गुर्निरागा, सदा रहे जे तत्व ताजा नगिजिणं चंदामी नेमि, रजोहरण विरतीनो वेली अरिष्टनेमिं नमामि नेमि, ज्ञान-ध्याननो वढती हेलो रजोहरण अंतरनुं पारस, पारसनुं गारे बनवु वारस वर्धमाननुं मान थईने, जिनशासननो (शान कईने) ....

समवसरणे रोखवाने निरखता, माता मरुदेवा केवली याता सुलसा गयणा-रेवती कुंती, रजोहरणनी संगे जुगती सतीसोना-चाहाही ने सुंदरी, स्त्रोहरण लई मुक्तिने वरती कोमिंर्भत नाद जगावी, जोहरणनी शान मजावी राजिमती प्रिंय नेमना पंथे, श्रमणो बने गिरनारी संगे चंदना चोरनी यह निरखती, श्रमणी बने प्रभुवीरनी पहेली रगोहरण गोयमनुं गौरव, रजोहरण सुधर्मनुं सवर रजोहरणना गुणला मावे, कयवसा (शुभ भावे-भावे) ....

तोर्थंकरो छ आयु दान, रमोहरणनुं मंगलदान रगोहरणने गे मेळवता, पंचम पदमां पामे स्थान सूरिवर मुनिवर- श्रमणी महान, जिनशासननी जे छे शान

उजवल उजवल वेष घरे, पंचम काले गे निषर्कटक चारित्र रहे, गांगु हुं प्रभुख मको संयम मने आ भवे ....

Rajoharan daan (the fastest dhun) Sponsored Mumukshu parivar Singer & writer Kaivan shah (surat) (મમ મુંડાવેહ મમ પવાવેહ) Female voice Virti kaivan shah Recording Musical aroma films & studio Music Tejas Mixing & mastring Jaydeep raval Edit B.h production house Special thanks Sonal shah & virti shah
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