Mara vairagi ne vandan







तरवा निकळ्या दुःख-दरीयो लईने संयम, शिवसुख नो मारग धरीयो जपता अर्हम... मुनी बनता गुरु-शिष्योनो भासे संगम, ने श्रावकमाथी बनीया तीरथ जंगम...

अंतर थी हुं नमीने रे करु, वैरागी ने वंदन... हो मारा वैरागी ने वंदन... ||धृ ||

{ जिनवर सर्वोपरि छे जेना माटे, गुरु छे प्राथमिकता हरेक वाते}.. (२) ने अविहड श्रद्धा प्रभु पर छे जेना माथे, ने धर्म नी दृढता एवी जेना संगाथे, अंतर थी हुं नमीने रे करु, वैरागी ने वंदन...

हो मारा वैरागी ने वंदन... ||१||

{ जिनवर प्रत्ये अनन्य जे अनुरागी, गुरु नी आज्ञा सामे जेणे स्वेच्छा त्यागी}.. (२) कष्टों मां पण जेणे मन समता राखी, चिदानंद नी अभिरुचि जेणे चाखी, अंतर थी हुं नमीने रे करु, वैरागी ने वंदन... हो मारा वैरागी ने वंदन... || २ ||

Lyrics

Singer: Aman jain Music Production and Mixing : Vishal Khatri Lyrics : SANKET GANDHI
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