Tara vina nem(reprised)
तारा विना नेम मने, एकलडु लागे
दर्शन देवाने वहेलो आवजे...
तारा विना नेम, एकलडु लागे
तमे हृदयमा ने प्राण मा नेम, हर क्षण छो मारा ध्यान मा दादा तारा स्पर्श थी, हैया नाचे सहुना हर्ष थी नेम तमे प्रीत छो, जगत नी रित छो... (२) सहुना मन ना, मन मीत छो तारा विना नेम, एकलडु लागे दर्शन देवाने वहेलो आवजे...
सवार तारा नाम थी नेम, सांज तारा नाम थी दिवस तारा नाम थी नेम, रात तारा नाम थी हृदय धबकार छो, जीवन सथवार छो.. (२) पापी ने पण तमे तारणारा छो तारा विना नेम, एकलडु लागे दर्शन देवाने वहेलो आवजे...
SINGER:MANTHAN SHAH
NEW LYRICS:MANTHAN SHAH
MUSIC:MANTHAN SHAH
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SPECIAL THANKS TO:
NAITIK MEHTA
SHRUT SHAH(SURAT)
BHAVYA SHAH(SURAT)
SNEH SHAH