Antarikshe Vase Prannath








अंतरीक्षे वसे प्राणनाथ जगतना..(२)

थयी चिंता ए राजाने, मारा प्रभु छे साजाने, अने पाछळ जोता स्थिर थया नाथ खलकनां, अंतरीक्षे वसे प्राणनाथ जगतना || ध्रु ||

प्रभु नी प्रतीमा कुवे पधरावी, तो धरणेंद्र देव पुजे रे, प्रभुना संपर्के आवेलु ए पाणी, रोग सहुना दुर करे रे, ए तडफडता जीवोने पण शाता अपावे, एक्रोधे बळता हैये समता लावे, ए प्रभु नु अंतरथी कोई ध्यान लगावे, तो ए सहूना संकल्प समाधान करावे, लोभ माया ने ठारे, राग-द्वेषथी पार उतारे, मिथ्याभिमान उतारे ए तो राजा-रंकना, अंतरीक्षे वसे प्राणनाथ जगतना... [१]

प्रभु नी प्रतिभा जुवे नरनारी, ते रोमांचनो अनुभव करे, प्रभु दरीशन पछी नयनोनी जोडी, अन्य दरबारे ना फरे, एनु झळहळतु सौंदर्य सहुने मोहे,

एना मुखे मलकतु स्मित शितल सोहे, एनी गाथा छे अजरामर स्रुष्टी माहे, छे जाग्रत सदीओ थी जेने दुनीया चाहे, हवे दुरी ना सहवाय, भक्तोने ना रहेवाय, संकेत आपो द्वार खोली नाथ मिलनना, अंतरीक्षे वसे प्राणनाथ जगतना... [२]



Song Credits: Song: Antarikshe Vase Prannath
Singer: Jainam Varia & Vilesh Jain Lyrics: Sanket Gandhi Music: Hitesh Udani Video By: Parampath Special Thanks to Ajay-Atul and Creative Productions !
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