VANDE GURUVARAM
ग म प रे सा रे नी रे
ग म प ग रे रे सा सा
हृदय मा स्थापू हु गुरुवर आपने, दूर करो ने मारा भव संतापने, वंदे गुरुवरम्, मारा गुरुवरम्...
भव वन मा भटकी रह्यो तो, विषय कषाय मा खुपी रह्यो तो, सिंच्यो मारा जीवन बाग़ ने, दूर करो ने मारा भव संतापने, हृदय मा स्थापू हु गुरुदेव आपने, दूर करो ने मारा भव संतापने, वंदे गुरुवरम्, मारा गुरुवरम्....
ग म प रे सा रे नी रे ग म प ग रे रे सा सा
कर्मसत्ता ए खूब नचाव्यो, अज्ञानता ए मुजने रडावयो, गुरु आप आवि उगारो आ बाळने, दूर करो ने मारा भव संतापने, वंदे गुरुवरम्, मारा गुरुवरम्...
दिवसों विती गया गुरु आप विना, आप दर्शन विना मारा नयनो भीना, याद करू हु आपना उपकारों ने, दूर करो ने मारा भव संतापने, वंदे गुरुवरम्, मारा गुरुवरम्....
जयन्त गुरु नू स्मरण थाये, मुखड़ा ऊपर स्मित रेलाये, जिनागम समरे आपना श्रुत पान ने, दूर करो ने मारा भव संतापने, आपना अणुव्रत पावू मुक्ति काज रे, दूर करो ने मारा भव संतापने, हृदय मा स्थापू हु गुरुदेव आपने, दूर करो ने मारा भव संतापने, वंदे गुरुवरम्, मारा गुरुवरम्...