Mane Vesh Shraman No Maljo Re
मने वेश श्रमणनो मळजो रे...
ममता मोटाई, मोहमाया ना.. (२) बंधन सघळा, टळजो रे,
मने वेश श्रमणनो मळजो रे..(२)
आठ पहोरनी साधना काजे, वहेली परोढे हुं जागुं.. (२) श्वासो लेवा माटे पण हुं, गुरुनी आणा मांगु,
आंख ईर्यासमिते ढळजो रे..(२) मने वेश श्रमणनो मळजो रे... (२)
सूत्र अर्थ ने स्वाध्याय साधी..(२) शास्त्रो सघळा वांचुं, जिनवाणी नुं, परम रहस्य, पामीने अंतर याचुं, अज्ञान बधुं मुज टळजो रे..(२) मने वेश श्रमणनो मळजो रे...(२)
आहारमां रस होय नवी रे, घर घर गोचरी भमवं, गामो गाम विहरता रेहवुं कष्ट अविरत्त खमवुं, मारा कर्मों निर्जरी जाजो रे.. मारा पाप पुराणा बळजो रे.. मने वेश श्रमणनो मळजो रे... (२)
पंच महाव्रत पालन करवुं.. (२) निर्दोष ने निष्कलंक,
समतामां लयलीन रेहवं.. (२) सरखा रायने रंक,
मारो साद प्रभु सांभळजो रे..(२)
मने वेश श्रमणनो मळजो रे... (२)
आजीवन अणीशुद्ध रहीने..(२) पामुं हुं अंतिम मंगल, साधी समाधि परलोक पंथे, आतम रहे अविचल, मारी सद् भावनाओ फळजो रे..(२) मारो साद प्रभु सांभळजो रे...
मने वेश श्रमणनो मळजो रे... मने वेश परम नो मळजो रे...
Lyrics: Devardhi Saheb
Shree Samkit Yuvak Mandal, Borivali
Singer : Piyush Shah