Chinta Mani Mari Chinta Chur
आणि मन शुद्ध आस्था, देव जुहारु शाश्वता
चिंतामणि मारी चिंता चूर, शंखेश्वर दादा मारी चिंता चूर..... ॥१॥ अणियाली थारी आँखड़ी, जाणे कामलतणी पांखड़ी मुख दीठा दुःख जावे दूर चिंतामणि मारी.
॥२॥ "
को कहने को कहने नमे, मारा मन मा तुही गमे
सदा जुहरु उगते सुर
चिंतामणि मारी.....
बिछड़िया बालेसर बेल, वैरी दुश्मन पाछा तू छे मारा हाज़रा हुज़ूर चिंतामणि मारी... ॥ ४ ॥
यह स्तोत्र जो मनमें धुरे, तेहनो काज सदाई सरे आधी व्याधि सब जावे दूर चिंतामणि मारी..
मुझ मन लागि तुमसु प्रीत, दुझो कोई न आवे चित्त
कर
तेज प्रताप प्रचुर
मुझ
चिन्तामणि मारी...
॥६॥
भवो भव देजो तुम पद सेव, श्री चिंतामणि अरिहंत देव ॐ समय सुन्दर कहे गुण भरपूर 'चिन्तामणि मारी....... 35 11611
song from Jain Bhajans
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