Nirkhyo Nemijinand ne
निरख्यो नेमि जिणंदने...
निरख्यो नेमि जिणंदने अरिहंताजी, राजिमती कर्यो त्याग भगवंताजी, ब्रह्मचारी संयम ग्रह्यो चार अरिहंताजी, अनुक्रमे थया वीतराग भगवंताजी... [१]
चामर चक्र सिंहासन अरिहंताजी, पादपीठ संयुकत भगवंताजी, छत्र चाले आकाशमां अरिहंताजी, देवदुंदुभी वर उत्त भगवंताजी... [२]
सहस जोयण ध्वज सोहत अरिहंताजी, प्रभु आगळ चालंत भगवंताजी, कनक कमल नव उपरे अरिहंताजी, विचरे पाय ठवंत भगवंताजी... [३]
चार मुखी दीये देशना अरिहंताजी, त्रण गढ झाकझमाल भगवंताजी,
केश रोम श्मश्रु नखा अरिहंताजी, वाधे नहि कोई काल भगवंताजी ... [४]
कांटा पण उंधा होये अरिहंताजी, पंच विषय अनुकूल भगवंताजी, षट्ऋतु समकाले फळे अरिहंताजी, वायु नहि प्रतिकूल भगवंताजी... [५]
पाणी सुगंध सुर कुसुमनी अरिहंताजी, वृष्टि होय सुरसाल भगवंताजी, पंखी दीये सुप्रदक्षिणा अरिहंताजी, वृक्ष नमे असराल भगवंताजी... [ ६ ]
जिन उत्तम पद पद्मनी अरिहंताजी सेवा करे सुरकोडी भगवंताजी, चार निकायना जघन्यथी अरिहंताजी, चैत्यवृक्ष तेम जोडी भगवंताजी... [७]
Song from Shree Samkit Yuvak Mandal (Borivali)
Singer : Prashant Shah