Sona Rupana Kalasho
सोना रूपाना कळशो शोभे न्यारा, आ तो मारा नाथजीनी अभिषेक धारा, मस्तकथी वहेती आवे, चरणोना समीप, साथै गुंजी रह्या, भक्तिना आ गीत, सोना रूपाना कळशो शोभे न्यारा, आ तो मारा नाथजीनी अभिषेक धारा, जय हो, प्रभु नी जय...
मेरू शिखरे उपर पांडुक वनडुं सोहे, त्यां बैठा मारा जिनजीनुं मुखडुं मोहे, ईन्द्रना खोळे बेठा देवाधिदेवा, तपापड थातां सहुं देवो लाहवो लेवा, क्रोडो कळशो द्वारा, आ अमृतनी धारा, प्रभुना अंगे अंगे स्पर्शे खळ खळ खळ,
वती आवे...
शत्रुंजी आदी नदीना पाणी लावु, पवित्र जलमा ईत्तरनी सुरभी महेकावुं, भक्तोनी भीडने संगीतनी महेफीलमां, ढोल नगारा शंख ध्वनिनो नाद गजावं, मन चढतुं जाय रंगे, हर्ष आनंद उमंगे, साथै आंखो मांथी नीकळे अश्रु नी धारा, मस्तकथी वहेती आवे...
Rachna: P. Pu. Muni Shri Heetsagarji M. S.