Jay Ho Vairagi







संयम का आनंद है, संयम से आनंद है, संयम में आनंद है, संयम ही आनंद है.... ना साधन संयोग है, बस साधना के योग से, संयमी को आनंद है, संयम ही आनंद है... मोहनगर से मोक्षनगर के राही है ये संयमी, जय हो वैरागी, धन्य वैरागी...

वैराग्य के उपवन में, महाव्रत के मधुबन में, सुंदर साधना साध रहे, संयमी ये सुमन है, धरती की इस धरा को धन्य करे विचरण से, एसा निर्दोष और निष्पाप, परम पवित्र जीवन है, समता के साधक, आतम उद्धारक, प्रभुआज्ञा स्वरूप को नमन,

जय हो वैरागी, धन्य वैरागी...

 दोषों से भरे हुए, संसार रूपी दलदल में,

निर्लेप रहते ऐसे थे, निर्विकारी पंकज है.... शासन के श्रृंगार है, ये धन्य धन्य अणगार है, दोषों से मुक्त है, इस अवनी का ये अचरज है, संसार त्यागी, वीर के वारस, के साहस को है नमन, जय हो वैरागी, धन्य वैरागी...

Lyrics: Jinang B. Sanghvi (Tapovani)

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