Vandu Sametshikharam
बंदु समेतशिखर, जय हो समेतशिखर...
पूर्व भारत की धन्यधरा पर, तेरा महिमा है परम, वंदु समेतशिखरं, जय हो समेतशिखरं... शामलीयाजी पारस का, जहां होता जयकारकं बंदु समेतशिखर, जय हो समेतशिखरं .....
बीस तीर्थंकर के चरणों से है ये धरती पावनं), साधना करके श्रीजिनवरजी (पाये हे मुक्तिपदं), मधुवन की ये पावन भूमि परम पवित्र दर्शन, मनमोहन है काया तेरी सृष्टि का आभूषणं, वंदु समेतशिखरं, जय हो समेतशिखरं..
यात्रा करते सबसे पहले, (भोमियाजी को वंदनं), शामलाजी के स्पर्शन से ही जीवन होगा मंगल), एक्कत्तीस टुको का चलो, करते है संकीर्तन, कल्याणक भूमि को पूजो महामहोदयकारकं बंदु समेतशिखर, जय हो समेतशिखर...
शिखरजी पर सिद्ध हुवे है, (कोडा-कोडी मुनिवरं), कलिकालमें महिमाशाली, (मुक्ति का आलंबनं), इस तीरथके कण-कण देते, हम सबको आमंत्रणं, चले चलो आओ शिखरजी, भक्ति हो शुखकारकं, बंदु समेतशिखर, जय हो समेतशिखरं....
विघ्नवारकं, परमतारकं, सर्वसिद्धिप्रसाधकं....
महा पवित्रं वंदे प्रीतम, नमो नमो परमेश्वरं .... वंदु समेतशिखरं, जय हो समेतशिखरं... Rachna: Pa. Pu. Muniraj Shri Hrimshekhar Vijayji M. S.
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