Jai Ho Angara








जेना रोम रोम थी वहेती करुणा नी धारा,

ने पंच महाव्रत ने मस्तक धरनारा, युद्ध खेले मोह सामे योद्धा अलगारा, जे ने महावीर ना मारग नी रक्षा करनारा, निज साधना थी सृष्टि ने मेहकावनारा, ओ शासन ना वीर तने वंदन अमारा...

जय हो अणगारा, शासन ना शणगारा, वीर पंथे सिंह जेम, चालनारा...

जिनवर संग छे, प्रीति अभंग छे, वैराग्य रंग थी खीलता अंगे अंग छे, उरमां उमंग छे, त्याग तरंग छे,

स्वधाय आगमो नो करता मन प्रसन्न छे, 

वैयावाच माणता, तत्वो ने जाणता,

सरळता सौम्यता धरनारा... कर्मों ने तोडता, गुरु थी मन जोडता, आतम नी शुद्धि थी, सिद्धि वरनारा...

जय हो अणगारा, शासन ना शणगारा, वीर पंथे सिंह जेम, चालनारा...

Lyrics: Bhavik Shah (Mulund)
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