Mere Mann Mein Baso








मेरे मन में बसी जिनजी, सुव्रत जिन मन में बसो... (2) मन में बसो प्यारे मन में बसो, मन में बसी स्वामी मन में बस.... (2)


मेरे मन में...


हृदय रूपी मन मंदीर में (2) आओ पधारो स्वामी;


अंतर्मन में आकर स्वामी (2) दूर करो सब खामी


मेरी सुनलो ना अब विनती, सुव्रत जिन मन में बसो...


मेरे मन में... 1


मन में गर तुम बस जाओ तो (2) माया मन से हटेगी मन में गर तुम बस जाओ तो (2) कर्म घटा भी घटेगी; विनती मै करू कितनी सुव्रत जिन मन में बसे......


मेरे मन में... 2


मेरे मन में तुम बस जाओ (2) तुममें मै खो जाउँ धीरे धीरे फिर तो स्वामी (2) तुमसा मे हो जाउँ आरजू है बस इक इतनी सुव्रत जिन मन में बस.....


मेरे मन में... 3



LYRICS:- JAINAM SANGHVI


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