Saiyam kyare Malse
रजोहरण मारूं मंगळसूत्र होजो, मारी मुहपत्ती हाथनुं मिंढण, तारी प्रीतनुं पानेतर, सजीने आवु छु, विरती विवाह माटे, संसार त्यजीने आवु छं...
संयम ना अर्थि शूरा, सत्व केवु लावे, जोई जोई मारूं हैयु, बोले आज भावे, ओ... संयम क्यारे मळशे... क्यारे क्यारे मळशे... ओ... मुजने क्यारे मळशे... ओ... संयम क्यारे मळशे...
हुं भोगमां डूबी, पळ पळ दुःख पामु, तृष्णामां सळगी, दिन रात गुमावू, होऽऽ तुं भोग तजीने, हर पळ सुख पामे, संतोष ना सुखमां, दिन रात वीतावे, भोजन थाळी रमवा शेरी, तारी मारी ए, हुं भटकु तुं मुजने छोडी, संयम पामु छे... ओ... संयम क्यारे मळशे... क्यारे क्यारे मळशे... ओ... मुजने क्यारे मळशे... ओ... संयम क्यारे मळशे...
आ मोंघु जीवन, पळमां वही जाशे, जो नहीं सुधरूं तो, क्यां आतम जाशे, गुरु मळीया एवा, जे हाथ पकडशे, दई साथ मने जे, मोक्षे लई जाशे, होऽऽ संयम नो अभिलाष हवे तो, रोम रोममां थाय, हृदय वीणाना तार वगाडी, योग नो काक्षी गाय... ओ... संयम क्यारे मळशे... क्यारे क्यारे मळशे... ओ... मुजने क्यारे मळशे... ओ... संयम क्यारे मळशे...
ओ... संयम क्यारे मळे... ओ...मुजने क्यारे मळशे...