Namo Antaryami Munisuvrat Swami
राजगृहीना राजदुलारा, गुणला गाउं आज तमारा... (2)
राजगृही भूपत भारी, अरजी अवधारो मारी:
कच्छप लंछनना धारी, अरजी अवधारो मारी मारे बनवु आतमरामी, परम पदने पामी नमो अंतर्यामि मुनिसुव्रत स्वामी... (2)
अतिशयवंत प्रभु अरिहंत, अति मन भावन छो स्वामी; तमे छो सूत सुमित्रनारे, पवित्र पावन छो स्वामी; मारे पण बनवु छे निर्मल निष्कामी, परम पदने पामी; नमो अंतर्यामि मुनिसुव्रत स्वामी... (2)
बताव्यो पथ जे तमे प्रभुवर, बनु ए पथनो हुं गामी: ओ माँ पद्माना नंदनजी, तमारा पदनो हुं कामी नथी जामी आ गुलामी बनवु अनामि, परम पदने पामी; नमो अंतर्यामि मुनिसुव्रत स्वामी... (2)
LYRICS:- JAINAM SANGHVI