VEER NA VAARAS









आनंद आयो, उत्सव लायो, शांति सोम दरबार, गगने गुंजे, पडघम एवा, गच्छधुरानो सत्कार रे....


गुरुना शरणे, गुरुना चरणे, गुरुना गुणनुं गुंजन, गुरु नयनोथी, वरसी रह्युं छे, करुणा रसनुं अंजन, शासन शिल्पी, शासन रागी, शासन दाझे कै रातो जागी,


वरना वारस बनीने वीरना विचार, वीना सिंह नादे करे ए सत्वनो संचार, वीरजीना तत्वोने समजावे ए हरदम, शुध्धिना स्वामी जे तीरथ मारुं जंगम...


सौम्य स्वभावी, समताधारी, आतरामी ने सुव्रतधारी, सुंदर वाणी, छे वितरागी, "अंकित" करती गुण वैरागी, शील संयममां, नित रहेनारी, गुरुमाँ मारी छे प्यारी प्यारी,


वीरना वारस बनीने वीरना विचार, वीरना सिंह नादे करे ए सत्वनो संचार, वीरजीना तत्वोने समजावे ए हरदम, शुधिना स्वामी जे तीरथ मारुं जंगम...


प्रकृष्टपुण्यधारीणम् सकलसंतापहारीणम् । महागणाधिपम् वंदे श्री सोमसुंदरसूरिश्वरम् ॥


Lyrics: Ankit Shah (Surat)


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