Sugandh Nu Sarnamu






सुगंधनु सरनामु संयम कोयलनो टहुकार संयम झरणानु संगीत संयम सर्व जीवोथी प्रीत संयम (1)

जीवन गुरूने, चरणे समर्पण दुर्गतिनु नहीं हवे, कोई कारण शुभभावोथी महके संयम (2)

जे करें सहज उपकार जेना मनमां नहीं कोई भार ऐवा मुनिवरनो जयकार ऐवा अणगारनो जय कार ।।

पंचाचार नु पालन छे प्रभु वचनों नु चिंतन छे अष्ट प्रवचन माता नी गोदमा जीवनभर छलकतो आनंद छे आनंद छे (3)

श्रमण धर्म नो जय जय कार विरति धर्म तो जय जय कार चारित्र धर्म नो जय जय कार जिनशासन नो जय जय कार ॥

तारी करुणा अनराधार छूट से अभ्यंतर संसार भक्ति मैत्री शुद्धि ना संगे भवसागर ने सहेजें करशुं पार (4)

जय जय हो अणगार तने वंदु वार हजार ओ शासनना शाणगार थईए भवोदधि पार ||
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