Tum Sharanam Aham Pavajami






संयम, संयम, संयम, संयम...

त्याग धर्मनी, श्रमण धर्मनो, होजो जय जयकार... नेहल ने भक्ति हवे करशे परमनो एहसास...

आतम तत्त्वने ओळखी आजे, चाल्या तमे तो नेमना पंथे, भाव श्रमणनी उघडे दिशाओ, जन्म-मरण थी हुं पामुं विसामो, उज्जवळ करजो मन परिणामो, तुम शरणं अहं पवज्जामि, देहि में संजम ओ गुरुदेवा...

वर्षो नी अभिलाष संयमनी, सफळ थई छे आजे, सुख सामग्री त्याग करी छे, श्रमण धर्मने काजे, हो लाख नमन हो, वैरागी प्यारा.... बनवा चाली तुं हवे चंदनबाळा... साधी-समाधि मोक्षने पंथे, पामुं अंतिम मंगल,

तुम शरणं अहं पवज्जामि, देहि में संजम ओ जम ओ गुरुदेवा...

नानी वयमां संजम लेवा, सत्त्व तमे अवधार्यु, मोह-माया ने तजवा माटे, गुरुकुलवासने याच्चुं, हो धैर्यने धारी, भवपार उतरवा... हवे सिद्धिगति नी अनुभूति करवा... मारा आतमने पण थाशे, प्रभु तुल्य स्पंदन, तुम शरणं अहं पवज्जामि, देहि में संजम ओ गुरुदेवा...

नेहल करशे संयम प्रयाण, भक्ति थी मुक्ति तरफ...
A devoted Journey of Mumukshu Kenolbhai to become Pa. Pu. Muniraj Shree Kunthubodhivijayji Maharaj Saheb
Lyrics- Bhartiben Gada
Singers- Vaibhavbhai Doshi & Jainambhai Varia
Music- Hiteshbhai Udani ( Infinity Studio )


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