Updhan Tap Kar Aaj
मै तो निकल पड़ा था, दुनिया बदलने,
पर मैने जाना ये के, कुछ भी न वश में,
तब मैने झांका अपने, भीतर मन में..
उपधान तप कर आज, मुझे मोक्ष माड़ की आश,
उपधान तप कर आज, मुझे खुद की है तलाश..
गुरुकुल वास में, गुरुजी की छांव में,
परमात्मा की पहचान है हुई,
प्यासा बना हु मैं, प्रभु के स्वभाव का,
गुरुदेव की जो, कृपा हुई है।।
रागी रहा था मैं तो, पूरे जीवन में,
खो ही गया था मैं तो, इस भव वन में,
राह दिखाई मुझको, संसार वन में ,
उपधान तप कर आज, मुझे मोक्ष माड़ की आश,
उपधान तप कर आज, मुझे खुदकी है तलाश।
निंदा की गोद से, अब तो निकलके,
शुभ भाव में ही, मुझको है रहना,
उपधान अंश है, साधु जीवन का,
महा व्रतों का, संयम जीवन का।।
नमोकार मंत्र का अधिकार है मिला,
मोह को हराने का, सिंहसत्व है खिला,
मोह की पराजय का, शंखनाद है हुआ।।
उपधान तप कर आज, मुझे मोक्ष माड़ की आश,
उपधान तप कर आज, मुझे खुदकी है तलाश
Credits:
Music: Jainam Mehta
Graphics: Janvi Shah
Lyrics: Vatsal Mehta