Saiyam Manorath
रात' दि मैं सेव्या, विरतीना विचार, मैं नजरे निरख्या, श्रमणोना आचार, हवे जागी रे मनमा एकज प्यास...
हुं मांगुं परमनो पथ, मारा संयम मनोरथ, मने लागी संयमनी रढ, मारा संयम मनोरथ, प्रभु आणना लई शपथ, मारा संयम मनोरथ, (शासन दिने लउं शपथ, मारा संयम मनोरथ) जागी गयो..जागी गयो रे...
हे वीर तारी मीठी वाते, गोयमादि विनयी थया, ने शरणु साचुं पामीने, तुज शासन वंशी बन्या, ए वैशाखी अगियारसे, उजळा ए वेष धर्या, ते शासन स्थापी धन्यदिने, तुज वेषमां घेला कर्या, ए धन्य पळे भळवा, गुरु शरणमां विहरवा, वीरवचने 'अंकित' थवानो, एकज आ तो छे जिनपथ, हुं मांगुं परम नो पथ...
चौद राजे अभयपथ... मारा संयम मनोरथ.. वीरनो निर्मळ पथ... मारा संयम मनोरथ.. हसता मुखे शपथ... मारा संयम मनोरथ.. आशिष वर्षानो पथ... मारा संयम मनोरथ.. खुशीमां रहेवानो पथ... मारा संयम मनोरथ.. कृपावृष्टि अनहद... मारा संयम मनोरथ.. मारा संयम मनोरथ... मारा संयम मनोरथ...
Lyrics: Ankit Shah (Surat)
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